| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 5: सुकेश के पुत्र माल्यवान्, सुमाली और माली की संतानों का वर्णन » श्लोक 36-37 |
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| | | | श्लोक 7.5.36-37  | वज्रमुष्टिर्विरूपाक्षो दुर्मुखश्चैव राक्षस:॥ ३६॥
सुप्तघ्नो यज्ञकोपश्च मत्तोन्मत्तौ तथैव च।
अनला चाभवत् कन्या सुन्दर्यां राम सुन्दरी॥ ३७॥ | | | | | | अनुवाद | | वज्रमुष्टि, विरुपाक्ष, राक्षस दुर्मुख, सुप्तघ्न, यज्ञकोप, मत्त और उन्मत्त- ये सात पुत्र थे। श्री राम! इनके अलावा सुंदरी के गर्भ से अनला नाम की एक सुंदर कन्या भी पैदा हुई। | | | | Vajramushti, Virupaksha, the demon Durmukh, Suptaghna, Yagyakop, Matta and Unmatta—these were the seven sons. Shri Ram! Besides these, a beautiful daughter named Anala was also born from Sundari's womb. | | ✨ ai-generated | | |
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