श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 5: सुकेश के पुत्र माल्यवान्, सुमाली और माली की संतानों का वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.5.27 
तस्यां वसत दुर्धर्षा यूयं राक्षसपुंगवा:।
अमरावतीं समासाद्य सेन्द्रा इव दिवौकस:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे भयंकर दैत्यों! जैसे इन्द्र आदि देवता अमरावतीपुरी में निवास करते हैं, वैसे ही तुम भी लंकापुरी में जाकर निवास करो॥ 27॥
 
You fierce demons! Just as the gods like Indra reside in Amaravatipuri, you too should go and reside in Lankapuri.॥ 27॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd