| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 5: सुकेश के पुत्र माल्यवान्, सुमाली और माली की संतानों का वर्णन » श्लोक 20-22h |
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| | | | श्लोक 7.5.20-22h  | ओजस्तेजोबलवतां महतामात्मतेजसा।
गृहकर्ता भवानेव देवानां हृदयेप्सितम्॥ २०॥
अस्माकमपि तावत् त्वं गृहं कुरु महामते।
हिमवन्तमुपाश्रित्य मेरुं मन्दरमेव वा॥ २१॥
महेश्वरगृहप्रख्यं गृहं न: क्रियतां महत्। | | | | | | अनुवाद | | महामते! जो देवता ओज, बल और तेज से युक्त होने के कारण महान हैं, उनके लिए आप अपनी शक्ति से इच्छित भवन का निर्माण करते हैं, अतः आप हमारे लिए भी हिमालय, मेरु अथवा मंदराचल पर जाकर भगवान शंकर के दिव्य भवन के समान विशाल निवास का निर्माण करें। 20-21 1/2॥ | | | | Mahamate! For those gods who are great because they are full of vigor, strength and brilliance, you build the desired mansion with your power, therefore, for us too, go to the Himalayas, Meru or Mandarachal and build a huge abode like the divine mansion of Lord Shankar. 20-21 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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