श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 5: सुकेश के पुत्र माल्यवान्, सुमाली और माली की संतानों का वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.5.17 
वरं लब्ध्वा तु ते सर्वे राम रात्रिंचरास्तदा।
सुरासुरान् प्रबाधन्ते वरदानसुनिर्भया:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे राम! वरदान पाकर वे समस्त रात्रिचर प्राणी निर्भय हो गए और देवताओं तथा दानवों को भी पीड़ा देने लगे॥17॥
 
Lord Rama! Having received the boon, all those night creatures became fearless and started tormenting even the gods and demons.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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