श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.48.8 
न खल्वद्यैव सौमित्रे जीवितं जाह्नवीजले।
त्यजेयं राजवंशस्तु भर्तुर्मे परिहास्यते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे सुमित्राकुमार! मैं अभी गंगाजी के जल में प्राण त्याग देती; परन्तु अभी ऐसा नहीं कर सकती; क्योंकि ऐसा करने से मेरे पति का वंश नष्ट हो जाएगा॥8॥
 
O Sumitrakumar! I would have immersed my life in the waters of river Ganga right now; but I cannot do so right now; because by doing so my husband's dynasty will be destroyed. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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