श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.48.4 
किं नु पापं कृतं पूर्वं को वा दारैर्वियोजित:।
याहं शुद्धसमाचारा त्यक्ता नृपतिना सती॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मैंने पूर्वजन्म में कौन-सा पाप किया था अथवा किसको अपनी पत्नी से अलग कर दिया था, कि मेरे पवित्र आचरण को छोड़कर भी राजा ने मुझे त्याग दिया है? ॥4॥
 
What sin did I commit in my previous life or whom did I cause to be separated from my wife, that despite my pious conduct, the King has forsaken me?' ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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