श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 48: सीता का दुःखपूर्ण वचन, श्रीराम के लिये उनका संदेश, लक्ष्मण का जाना और सीता का रोना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.48.10 
श्वश्रूणामविशेषेण प्राञ्जलिप्रग्रहेण च।
शिरसा वन्द्य चरणौ कुशलं ब्रूहि पार्थिवम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार मेरी सब सासों से भी हाथ जोड़कर प्रार्थना करो और मेरी ओर से उनके चरणों में प्रणाम करो। महाराज के चरणों में भी सिर झुकाकर मेरी ओर से उनका कुशलक्षेम पूछो॥10॥
 
‘Pray to all my mother-in-laws in the same manner with folded hands and bow at their feet on my behalf. Also bow your head at the feet of Maharaj and ask about his well-being on my behalf.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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