श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 47: लक्ष्मण का सीताजी को नाव से गङ्गाजी के उस पार पहुँचाकर बड़े दुःख से उन्हें उनके त्यागे जाने की बात बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.47.18 
पतिव्रतात्वमास्थाय रामं कृत्वा सदा हृदि।
श्रेयस्ते परमं देवि तथा कृत्वा भविष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे देवी! तुम सदैव श्री रघुनाथजी को अपने हृदय में धारण करो और माता-पिता की भक्ति का पालन करो। ऐसा करने से तुम्हारा परम कल्याण होगा। 18॥
 
Goddess! You should always keep Shri Raghunathji in your heart and follow the devotion to your parents. Doing this will bring you ultimate welfare. 18॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे सप्तचत्वारिंश: सर्ग: ॥ ४ ७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें सैंतालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ४ ७॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)