श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 47: लक्ष्मण का सीताजी को नाव से गङ्गाजी के उस पार पहुँचाकर बड़े दुःख से उन्हें उनके त्यागे जाने की बात बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.47.10 
वैदेह्या चोद्यमानस्तु लक्ष्मणो दीनचेतन:।
अवाङ्मुखो बाष्पगलो वाक्यमेतदुवाच ह॥ १०॥
 
 
अनुवाद
विदेहनन्दिनी की प्रेरणा पाकर लक्ष्मण दुःखी मन से, नीचे मुख करके तथा गले में आँसू भरकर इस प्रकार बोले -॥10॥
 
Upon being inspired by Videhanandini, Lakshmana, with a sad mind and his face lowered and with tears in his throat, spoke thus -॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)