श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 46: लक्ष्मण का सीता को रथ पर बिठाकर उन्हें वन में छोड़ने के लिये ले जाना और गङ्गाजी के तट पर पहुँचना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.46.4 
सुमन्त्रस्तु तथेत्युक्त्वा युक्तं परमवाजिभि:।
रथं सुरुचिरप्रख्यं स्वास्तीर्णं सुखशय्यया॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब सुमन्तराम ने 'बहुत अच्छा' कहकर तत्काल ही उत्तम घोड़ों से जुता हुआ एक सुन्दर रथ मँगवाया, जिस पर सुखदायक शय्याओं से युक्त सुन्दर बिछौना बिछा हुआ था॥4॥
 
Then Sumantram said 'very good' and immediately brought a beautiful chariot drawn by excellent horses on which a beautiful bedding with comfortable beds was spread. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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