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श्लोक 7.46.17  |
श्वश्रूणां चैव मे वीर सर्वासामविशेषत:।
पुरे जनपदे चैव कुशलं प्राणिनामपि॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| वीर! मेरी सभी सासें समान रूप से सुखी रहें। नगर और जनपद के सभी प्राणी सुरक्षित रहें।॥17॥ |
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| ‘Veer! May all my mothers-in-law remain equally happy. May all beings in the city and the district remain safe.’॥ 17॥ |
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