श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 46: लक्ष्मण का सीता को रथ पर बिठाकर उन्हें वन में छोड़ने के लिये ले जाना और गङ्गाजी के तट पर पहुँचना  »  श्लोक 10-12h
 
 
श्लोक  7.46.10-12h 
वासांसि च महार्हाणि रत्नानि विविधानि च॥ १०॥
गृहीत्वा तानि वैदेही गमनायोपचक्रमे।
इमानि मुनिपत्नीनां दास्याम्याभरणान्यहम्॥ ११॥
वस्त्राणि च महार्हाणि धनानि विविधानि च।
 
 
अनुवाद
बहुमूल्य वस्त्र और नाना प्रकार के रत्न लेकर वैदेही सीता वन यात्रा के लिए तैयार हो गईं और लक्ष्मण से बोलीं, ‘मैं ये सब बहुमूल्य वस्त्र, आभूषण और नाना प्रकार के रत्न ऋषियों की पत्नियों को दूँगी।’ 10-11 1/2
 
Taking precious clothes and various kinds of gems, Vaidehi Sita got ready for the forest journey and said to Lakshmana, 'I will give all these precious clothes, ornaments and various kinds of gems to the wives of sages.' 10-11 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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