श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 45: श्रीराम का भाइयों के समक्ष सर्वत्र फैले हुए लोकापवाद की चर्चा करके सीता को वन में छोड़ आने के लिये लक्ष्मण को आदेश देना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  7.45.23-24h 
पूर्वमुक्तोऽहमनया गङ्गातीरेऽहमाश्रमान्॥ २३॥
पश्येयमिति तस्याश्च काम: संवर्त्यतामयम्।
 
 
अनुवाद
सीताजी ने पहले मुझसे कहा था कि वे गंगाजी के तट पर ऋषियों के आश्रम देखना चाहती हैं; अतः उनकी यह इच्छा भी पूरी की जाए।॥23 1/2॥
 
Sita had earlier told me that she wanted to see the ashram of the sages on the banks of the Ganges; hence this wish of hers should also be fulfilled.'॥ 23 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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