श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 45: श्रीराम का भाइयों के समक्ष सर्वत्र फैले हुए लोकापवाद की चर्चा करके सीता को वन में छोड़ आने के लिये लक्ष्मण को आदेश देना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.45.16-17h 
श्वस्त्वं प्रभाते सौमित्रे सुमन्त्राधिष्ठितं रथम्॥ १६॥
आरुह्य सीतामारोप्य विषयान्ते समुत्सृज।
 
 
अनुवाद
अतः हे सुमित्रापुत्र! कल प्रातःकाल तुम सारथी सुमन्त्र द्वारा चलाए जाने वाले रथ पर सवार होकर सीता को साथ लेकर इस राज्य की सीमा के बाहर छोड़ आओ।॥16 1/2॥
 
‘Therefore, son of Sumitra, tomorrow morning you should board a chariot driven by charioteer Sumantram and take Sita along with you and leave her outside the boundaries of this kingdom.॥ 16 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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