श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 45: श्रीराम का भाइयों के समक्ष सर्वत्र फैले हुए लोकापवाद की चर्चा करके सीता को वन में छोड़ आने के लिये लक्ष्मण को आदेश देना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.45.15-16h 
तस्माद् भवन्त: पश्यन्तु पतितं शोकसागरे॥ १५॥
नहि पश्याम्यहं भूतं किंचिद् दु:खमतोऽधिकम्।
 
 
अनुवाद
'तो तुम सब मेरी तरफ़ देखो। मैं दुःख के सागर में डूब गया हूँ। इससे बड़ा कोई दुःख मुझे याद नहीं आता।' 15 1/2
 
‘So you all look at me. I have fallen into a sea of ​​sorrow. I don't remember any sorrow greater than this. 15 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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