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श्लोक 7.45.12-13h  |
अकीर्तिर्यस्य गीयेत लोके भूतस्य कस्यचित्॥ १२॥
पतत्येवाधमाँल्लोकान् यावच्छब्द: प्रकीर्त्यते। |
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| अनुवाद |
| जिस प्राणी की अपकीर्ति संसार में चर्चा का विषय बन जाती है, वह अधम लोकों (नरकों) में गिरता है और जब तक अपकीर्ति की चर्चा होती रहती है, तब तक वहीं रहता है।॥12 1/2॥ |
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| Any being whose infamy becomes the subject of discussion in the world, falls into the inferior worlds (hells) and remains there as long as the infamy is discussed.॥ 12 1/2॥ |
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