श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 45: श्रीराम का भाइयों के समक्ष सर्वत्र फैले हुए लोकापवाद की चर्चा करके सीता को वन में छोड़ आने के लिये लक्ष्मण को आदेश देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.45.1 
तेषां समुपविष्टानां सर्वेषां दीनचेतसाम्।
उवाच वाक्यं काकुत्स्थो मुखेन परिशुष्यता॥ १॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सब भाई वहाँ दुःखी मन से बैठे हुए थे। उस समय श्री राम ने सूखे मुख से उनसे यह कहा-॥1॥
 
In this manner all the brothers were sitting there with sad hearts. At that time Shri Ram said this to them with a dry mouth -॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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