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ramayan 7.44.4: वहाँ हाथ जोड़कर और प्रणाम करके उसने महात्मा लक्ष्मण से कहा - 'कुमार! राजा आपसे मिलना चाहते हैं। अतः शीघ्र आइए, विलम्ब न कीजिए।'॥4॥   |   ramayan सर्ग 7.44: श्रीराम के बुलाने से सब भाइयों का उनके पास आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 44: श्रीराम के बुलाने से सब भाइयों का उनके पास आना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.44.4 
उवाच सुमहात्मानं वर्धयित्वा कृताञ्जलि:।
द्रष्टुमिच्छति राजा त्वां गम्यतां तत्र मा चिरम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ हाथ जोड़कर और प्रणाम करके उसने महात्मा लक्ष्मण से कहा - 'कुमार! राजा आपसे मिलना चाहते हैं। अतः शीघ्र आइए, विलम्ब न कीजिए।'॥4॥
 
There, with folded hands and hailing him, he said to Mahatma Lakshmana - 'Kumar! The king wants to meet you. So come quickly, do not delay.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)