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तथा वदति काकुत्स्थे अवधानपरायणा:।
उद्विग्नमनस: सर्वे किं नु राजाभिधास्यति॥ २१॥
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी के ऐसा कहने पर सब भाई सावधान हो गए। सब लोग चिन्तित होकर सोचने लगे कि, 'कौन जाने महाराज हमसे क्या कहेंगे?'॥ 21॥
All the brothers became alert when Shri Ramchandraji said this. Everyone became worried and started thinking, 'Who knows what Maharaj will say to us?'॥ 21॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे चतुश्चत्वारिंश: सर्ग: ॥ ४ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें चौवालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ४ ४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥