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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 44: श्रीराम के बुलाने से सब भाइयों का उनके पास आना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.44.18 
तान् परिष्वज्य बाहुभ्यामुत्थाप्य च महाबल:।
आसनेष्वासतेत्युक्त्वा ततो वाक्यं जगाद ह॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महाबली रघुनाथ ने उन सबको अपनी भुजाओं से उठाकर हृदय से लगा लिया और कहा, "इन आसनों पर बैठ जाओ।" जब वे बैठ गए, तब उन्होंने फिर कहा,
 
The mighty Raghunath lifted them all with his arms and embraced them and said, "Sit on these seats." When they sat down, he again said,
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)