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ramayan 7.44.15-16h: उसने देखा कि श्रीराम का चेहरा इतना उदास हो गया है, मानो चंद्रमा पर कोई ग्रह आ गिरा हो। वह संध्या के समय सूर्य की तरह उदास हो रहा था।   |   ramayan सर्ग 7.44: श्रीराम के बुलाने से सब भाइयों का उनके पास आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 44: श्रीराम के बुलाने से सब भाइयों का उनके पास आना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.44.15-16h 
ते तु दृष्ट्वा मुखं तस्य सग्रहं शशिनं यथा॥ १५॥
संध्यागतमिवादित्यं प्रभया परिवर्जितम्।
 
 
अनुवाद
उसने देखा कि श्रीराम का चेहरा इतना उदास हो गया है, मानो चंद्रमा पर कोई ग्रह आ गिरा हो। वह संध्या के समय सूर्य की तरह उदास हो रहा था।
 
He saw Shri Ram's face looking so sad, as if a planet had struck the moon. It was becoming as gloomy as the sun in the evening.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)