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ramayan 7.44.12-14h: राजकुमारों के आगमन की बात सुनकर चिंता से व्याकुल इन्द्रियाँ वाले श्री रामजी ने उदास मुख और दुःखी मन से द्वारपाल को आदेश दिया, "इन तीनों राजकुमारों को शीघ्र मेरे पास ले आओ। मेरा जीवन इन्हीं पर निर्भर है। ये मेरे प्रिय आत्मा हैं।" ॥12-13 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.44: श्रीराम के बुलाने से सब भाइयों का उनके पास आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 44: श्रीराम के बुलाने से सब भाइयों का उनके पास आना  »  श्लोक 12-14h
 
 
श्लोक  7.44.12-14h 
कुमारानागताञ्छ्रुत्वा चिन्ताव्याकुलितेन्द्रिय:॥ १२॥
अवाङ्मुखो दीनमना द्वा:स्थं वचनमब्रवीत्।
प्रवेशय कुमारांस्त्वं मत्समीपं त्वरान्वित:॥ १३॥
एतेषु जीवितं मह्यमेते प्राणा: प्रिया मम।
 
 
अनुवाद
राजकुमारों के आगमन की बात सुनकर चिंता से व्याकुल इन्द्रियाँ वाले श्री रामजी ने उदास मुख और दुःखी मन से द्वारपाल को आदेश दिया, "इन तीनों राजकुमारों को शीघ्र मेरे पास ले आओ। मेरा जीवन इन्हीं पर निर्भर है। ये मेरे प्रिय आत्मा हैं।" ॥12-13 1/2॥
 
On hearing about the arrival of the princes, Sri Rama, his senses troubled with worry, with a downcast face and a sad heart, ordered the gatekeeper, "Bring these three princes to me quickly. My life depends on them. They are my dear souls." ॥12-13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)