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ramayan 7.44.10-11h: द्वारपाल की बात सुनकर शत्रुघ्न अपने उत्तम आसन से उठे, भूमि पर सिर टेका, मन ही मन भगवान राम की प्रार्थना की और तुरंत अपने निवासस्थान की ओर चल पड़े ॥10 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.44: श्रीराम के बुलाने से सब भाइयों का उनके पास आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 44: श्रीराम के बुलाने से सब भाइयों का उनके पास आना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.44.10-11h 
श्रुत्वा तु वचनं तस्य शत्रुघ्न: परमासनात्॥ १०॥
शिरसा वन्द्य धरणीं प्रययौ यत्र राघव:।
 
 
अनुवाद
द्वारपाल की बात सुनकर शत्रुघ्न अपने उत्तम आसन से उठे, भूमि पर सिर टेका, मन ही मन भगवान राम की प्रार्थना की और तुरंत अपने निवासस्थान की ओर चल पड़े ॥10 1/2॥
 
On hearing the gatekeeper's words, Shatrughna rose from his excellent seat, bowed his head to the ground, mentally prayed to Lord Rama and immediately proceeded towards his residence. ॥10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)