| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना » श्लोक 5-6 |
|
| | | | श्लोक 7.43.5-6  | मामाश्रितानि कान्याहु: पौरजानपदा जना:।
किं च सीतां समाश्रित्य भरतं किं च लक्ष्मणम्॥ ५॥
किं नु शत्रुघ्नमुद्दिश्य कैकेयीं किं नु मातरम्।
वक्तव्यतां च राजानो वने राज्ये व्रजन्ति च॥ ६॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘नगर और जनपद के लोग मेरे, सीता, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और माता कैकेयी के विषय में क्या बातें करते हैं? क्योंकि यदि राजा सदाचार और विचार से रहित हो, तो वह अपने राज्य में तथा वन में (ऋषि-मुनियों के आश्रम में) भी निन्दा का पात्र बनता है - उसकी बुराइयों की सर्वत्र चर्चा होती है।’॥5-6॥ | | | | ‘What do the people of the city and the district talk about me, Sita, Bharat, Lakshman, Shatrughna and mother Kaikeyi? Because if the king is devoid of good conduct and thinking, then he becomes the subject of criticism in his own kingdom as well as in the forest (in the ashram of sages and saints) – his evils are discussed everywhere.’॥ 5-6॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|