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ramayan 7.43.22: तब सबने भूमि पर सिर टेककर श्री राम को प्रणाम किया और विनीत स्वर में बोले, "प्रभु! भद्र ने जो कुछ कहा है, वह ठीक है; इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।"   |   ramayan सर्ग 7.43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 43: भद्र का पुरवासियों के मुख से सीता के विषयमें सुनी हुई अशुभ चर्चा से श्रीराम को अवगत कराना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.43.22 
सर्वे तु शिरसा भूमावभिवाद्य प्रणम्य च।
प्रत्यूचू राघवं दीनमेवमेतन्न संशय:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तब सबने भूमि पर सिर टेककर श्री राम को प्रणाम किया और विनीत स्वर में बोले, "प्रभु! भद्र ने जो कुछ कहा है, वह ठीक है; इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।"
 
Then all of them bowed their heads to the ground and bowed before Shri Ram and said in a humble voice, "Prabhu! What Bhadra has said is correct; there is no doubt in it at all."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)