vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना
»
श्लोक 5
श्लोक
7.42.5
प्रियङ्गुभि: कदम्बैश्च तथा च बकुलैरपि।
जम्बूभिर्दाडिमैश्चैव कोविदारैश्च शोभिताम्॥ ५॥
अनुवाद
प्रियंगु, धूलिकदम्ब, बकुल, जामुन, अनार और कोविदार आदि वृक्ष उस बगीचे की शोभा बढ़ाते थे॥5॥
Trees like Priyangu, Dhulikdamb, Bakul, Jamun, Pomegranate and Kovidar etc. used to beautify that garden. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×