श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.42.5 
प्रियङ्गुभि: कदम्बैश्च तथा च बकुलैरपि।
जम्बूभिर्दाडिमैश्चैव कोविदारैश्च शोभिताम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
प्रियंगु, धूलिकदम्ब, बकुल, जामुन, अनार और कोविदार आदि वृक्ष उस बगीचे की शोभा बढ़ाते थे॥5॥
 
Trees like Priyangu, Dhulikdamb, Bakul, Jamun, Pomegranate and Kovidar etc. used to beautify that garden. 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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