| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना » श्लोक 4 |
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| | | | श्लोक 7.42.4  | लोध्रनीपार्जुनैर्नागै: सप्तपर्णातिमुक्तकै:।
मन्दारकदलीगुल्मलताजालसमावृताम्॥ ४॥ | | | | | | अनुवाद | | उसके चारों ओर लोध, कदंब, अर्जुन, नागकेसर, चितवन, अतिमुक्तक, मंदार, केला तथा झाड़ियों और लताओं के समूह फैले हुए थे। 4. | | | | Lodh, Kadamba, Arjun, Nagkesar, Chitavan, Atimuktaka, Mandar, Banana and groups of bushes and creepers were spread all around it. 4. | | ✨ ai-generated | | |
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