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ramayan 7.42.36: मिथिला की पुत्री जानकी से ऐसा कहकर ककुत्स्थ पुत्र श्री राम अपने मित्रों के साथ मध्य भाग में चले गये।   |   ramayan सर्ग 7.42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.42.36 
एवमुक्त्वा तु काकुत्स्थो मैथिलीं जनकात्मजाम्।
मध्यकक्षान्तरं रामो निर्जगाम सुहृद‍्वृत:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
मिथिला की पुत्री जानकी से ऐसा कहकर ककुत्स्थ पुत्र श्री राम अपने मित्रों के साथ मध्य भाग में चले गये।
 
Having said this to Janaki, the daughter of Mithila, Sri Rama, the son of the Kakutstha clan, went to the middle section with his friends.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे द्विचत्वारिंश: सर्ग: ॥ ४ २॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें बयालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ४ २॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)