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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना
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श्लोक 30
श्लोक
7.42.30
दृष्ट्वा तु राघव: पत्नीं कल्याणेन समन्विताम्।
प्रहर्षमतुलं लेभे साधुसाध्विति चाब्रवीत्॥ ३०॥
अनुवाद
उस समय श्री रामजी ने अपनी पत्नी को गर्भावस्था के शुभ लक्षणों से युक्त देखकर अपूर्व आनन्द का अनुभव किया और कहा - "बहुत अच्छा, बहुत अच्छा।" ॥30॥
During this time Sri Rama, seeing his wife with the auspicious signs of pregnancy, felt unparalleled joy and said, "Very good, very good." ॥30॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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