| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना » श्लोक 3 |
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| | | | श्लोक 7.42.3  | चम्पकाशोकपुंनागमधूकपनसासनै:।
शोभितां पारिजातैश्च विधूमज्वलनप्रभै:॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | वह उद्यान चम्पा, अशोक, पुन्नाग, महुआ, कटहल, आसन और पारिजात के वृक्षों से सुशोभित था, जो धूम्ररहित अग्नि के समान चमक रहे थे। | | | | That garden was decorated with Champa, Ashoka, Punnaag, Mahua, Jackfruit, Asan and Paarijaat trees which radiated like a smokeless fire. | | ✨ ai-generated | | |
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