Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.42.28: सीताजी भी प्रातःकाल देवताओं का पूजन करके अपनी सब सासों की समान रूप से सेवा करती थीं॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 7.42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.42.28 
सीतापि देवकार्याणि कृत्वा पौर्वाह्णिकानि वै।
श्वश्रूणामकरोत् पूजां सर्वासामविशेषत:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
सीताजी भी प्रातःकाल देवताओं का पूजन करके अपनी सब सासों की समान रूप से सेवा करती थीं॥ 28॥
 
Sitaji too used to worship the gods in the morning and then serve all her mother-in-laws equally.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)