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श्लोक 7.42.28  |
सीतापि देवकार्याणि कृत्वा पौर्वाह्णिकानि वै।
श्वश्रूणामकरोत् पूजां सर्वासामविशेषत:॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| सीताजी भी प्रातःकाल देवताओं का पूजन करके अपनी सब सासों की समान रूप से सेवा करती थीं॥ 28॥ |
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| Sitaji too used to worship the gods in the morning and then serve all her mother-in-laws equally.॥ 28॥ |
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