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ramayan 7.42.27: धर्म को जानने वाले श्री रामजी दिन के पूर्वार्ध में धार्मिक अनुष्ठान करते थे और शेष आधे दिन अंतःकक्ष में रहते थे॥ 27॥   |   ramayan सर्ग 7.42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.42.27 
पूर्वाह्णे धर्मकार्याणि कृत्वा धर्मेण धर्मवित्।
शेषं दिवसभागार्धमन्त:पुरगतोऽभवत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
धर्म को जानने वाले श्री रामजी दिन के पूर्वार्ध में धार्मिक अनुष्ठान करते थे और शेष आधे दिन अंतःकक्ष में रहते थे॥ 27॥
 
Sri Ram, who knew the Dharma, used to perform religious rites in the earlier part of the day and used to stay in the inner chambers for the remaining half day.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)