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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  7.42.24-25h 
एवं रामो मुदा युक्त: सीतां सुरसुतोपमाम्॥ २४॥
रमयामास वैदेहीमहन्यहनि देववत्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान के समान प्रसन्न होकर श्री रामजी दिव्य कन्या के समान सुन्दरी विदेहनन्दिनी सीता के साथ आनन्दपूर्वक रहते थे।
 
Thus, Sri Rama, being happy like a god, used to enjoy the company of Videhanandini Sita, who was as beautiful as a celestial maiden. 24 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)