श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.42.2 
चन्दनागुरुचूतैश्च तुङ्गकालेयकैरपि।
देवदारुवनैश्चापि समन्तादुपशोभिताम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
चन्दन, अगुरु, आम, तुंग (नारियल), कालेक (लाल चन्दन) और देवदार के वन सब ओर से उसकी शोभा बढ़ा रहे थे॥ 2॥
 
Sandalwood, aguru, mango, tung (coconut), kaleaka (red sandalwood) and deodar forests were enhancing its beauty from all sides.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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