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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.42.15-16h 
नन्दनं हि यथेन्द्रस्य ब्राह्मं चैत्ररथं यथा॥ १५॥
तथाभूतं हि रामस्य काननं संनिवेशनम्।
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार इन्द्र और ब्रह्मा के पुत्र कुबेर द्वारा निर्मित चैत्ररथ का वन सुन्दर प्रतीत होता है, उसी प्रकार सुन्दर भवनों से सुसज्जित श्री राम की क्रीड़ाभूमि भी शोभायमान थी।
 
Just as the forest of Chaitrarath built by Kubera, the son of Indra and Brahma, looks beautiful, in the same way, Sri Rama's playground, adorned with beautiful buildings, looked beautiful. 15 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)