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ramayan 7.42.12: वहाँ तोते और तीतर मधुर स्वर में बोल रहे थे। हंस और सारसों का कलरव गूँज रहा था। तट पर लगे हुए पुष्पों से लदे हुए वृक्ष उनकी शोभा बढ़ा रहे थे॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 42: अशोकवनिका में श्रीराम और सीता का विहार, गर्भिणी सीता का तपोवन देखने की इच्छा प्रकट करना और श्रीराम का इसके लिये स्वीकृति देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.42.12 
दात्यूहशुकसंघुष्टा हंससारसनादिता:।
तरुभि: पुष्पशबलैस्तीरजैरुपशोभिता:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ तोते और तीतर मधुर स्वर में बोल रहे थे। हंस और सारसों का कलरव गूँज रहा था। तट पर लगे हुए पुष्पों से लदे हुए वृक्ष उनकी शोभा बढ़ा रहे थे॥12॥
 
The parrots and pheasants were speaking sweetly there. The chirping of swans and cranes was resonating. The trees on the banks, spotted with flowers, were enhancing their beauty.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)