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ramayan 7.41.5: हे विमान! महात्मा महाराज श्री राम ने युद्ध में भयंकर राक्षसराज रावण को मारकर तुम्हें जीत लिया है॥5॥   |   ramayan सर्ग 7.41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.41.5 
निर्जितस्त्वं नरेन्द्रेण राघवेण महात्मना।
निहत्य युधि दुर्धर्षं रावणं राक्षसेश्वरम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे विमान! महात्मा महाराज श्री राम ने युद्ध में भयंकर राक्षसराज रावण को मारकर तुम्हें जीत लिया है॥5॥
 
plane! Mahatma Maharaj Shri Ram has won you by killing the fierce demon king Ravana in the war. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)