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ramayan 7.41.3: हे प्रभु राम! कृपा करके मुझे प्रसन्न मुख से देखो। हे प्रभु! आपको तो पता ही होगा कि मैं कुबेर के महल से लौटा हुआ पुष्पक विमान हूँ।   |   ramayan सर्ग 7.41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.41.3 
सौम्य राम निरीक्षस्व सौम्येन वदनेन माम्।
कुबेरभवनात् प्राप्तं विद्धि मां पुष्पकं प्रभो॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु राम! कृपा करके मुझे प्रसन्न मुख से देखो। हे प्रभु! आपको तो पता ही होगा कि मैं कुबेर के महल से लौटा हुआ पुष्पक विमान हूँ।
 
Gentle Lord Rama! Kindly look at me with a happy face. Lord! You must know that I am the Pushpaka Vimana returned from Kubera's palace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)