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ramayan 7.41.2: एक दिन मध्याह्न (दोपहर के बाद) अपने भाइयों के साथ बैठे हुए महाप्रभु श्री रघुनाथजी ने आकाश से यह मधुर वाणी सुनी-॥2॥   |   ramayan सर्ग 7.41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.41.2 
अथापराह्णसमये भ्रातृभि: सह राघव:।
शुश्राव मधुरां वाणीमन्तरिक्षान्महाप्रभु:॥ २॥
 
 
अनुवाद
एक दिन मध्याह्न (दोपहर के बाद) अपने भाइयों के साथ बैठे हुए महाप्रभु श्री रघुनाथजी ने आकाश से यह मधुर वाणी सुनी-॥2॥
 
One day in the afternoon (after noon) while sitting with his brothers, Mahaprabhu Sri Raghunathji heard this sweet voice from the sky -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)