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ramayan 7.41.10: मैं सम्पूर्ण प्राणियों के लिए अजेय हूँ और कुबेर की आज्ञा के अनुसार आपकी आज्ञा का पालन करते हुए अपने प्रभाव से समस्त लोकों में विचरण करूँगा।॥10॥   |   ramayan सर्ग 7.41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 41: कुबेर के भेजे हुए पुष्पकविमान का आना और श्रीराम से पूजित एवं अनुगृहीत होकर अदृश्य हो जाना, भरत के द्वारा श्रीरामराज्य के विलक्षण प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.41.10 
अधृष्य: सर्वभूतानां सर्वेषां धनदाज्ञया।
चराम्यहं प्रभावेण तवाज्ञां परिपालयन्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैं सम्पूर्ण प्राणियों के लिए अजेय हूँ और कुबेर की आज्ञा के अनुसार आपकी आज्ञा का पालन करते हुए अपने प्रभाव से समस्त लोकों में विचरण करूँगा।॥10॥
 
I am invincible to all creatures, and as per Kubera's orders, I will travel in all the worlds with my influence, following your orders.'॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)