श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.4.9 
प्रजापति: पुरा सृष्ट्वा अप: सलिलसम्भव:।
तासां गोपायने सत्त्वानसृजत् पद्मसम्भव:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे रघुनन्दन! जल से प्रकट हुए कमल के रचयिता ब्रह्माजी ने पूर्वकाल में समुद्र में जल की रचना की और फिर उसकी रक्षा के लिए नाना प्रकार के जलचरों को उत्पन्न किया।
 
Raghunandan! Brahma, the creator of the lotus, who appeared from the water, created the water in the ocean in the past and then created various kinds of aquatic animals to protect it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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