श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.4.27 
ततो वृषभमास्थाय पार्वत्या सहित: शिव:।
वायुमार्गेण गच्छन् वै शुश्राव रुदितस्वनम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस समय भगवान शंकर पार्वतीजी के साथ वृषभ पर सवार होकर आकाश में भ्रमण कर रहे थे, तभी उन्होंने बालक का रोना सुना॥ 27॥
 
‘At that time Lord Shankar was travelling through the air (sky) on a bull along with Goddess Parvati. He heard the child crying.॥ 27॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd