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ramayan 7.4.26: उसके शरीर की कांति शरद ऋतु के सूर्य के समान थी। माँ द्वारा छोड़ा गया बालक अपनी मुट्ठी मुँह में डालकर धीरे-धीरे रोने लगा।   |   ramayan सर्ग 7.4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.4.26 
तयोत्सृष्ट: स तु शिशु: शरदर्कसमद्युति:।
निधायास्ये स्वयं मुष्टिं रुरोद शनकैस्तदा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उसके शरीर की कांति शरद ऋतु के सूर्य के समान थी। माँ द्वारा छोड़ा गया बालक अपनी मुट्ठी मुँह में डालकर धीरे-धीरे रोने लगा।
 
The radiance of his body was like the autumn sun. The child left by his mother put his fist in his mouth and started crying softly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)