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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.4.25 
रेमे तु सार्धं पतिना विस्मृत्य सुतमात्मजम्।
उत्सृष्टस्तु तदा गर्भो घनशब्दसमस्वन:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'सालक्तांगकटा अपने पुत्र को भूलकर पति के साथ रमण करने लगी। दूसरी ओर, उसका छोड़ा हुआ नवजात शिशु बादलों की गर्जना के समान ध्वनि करने लगा।
 
‘Forgetting her son, Salaktangkata started enjoying herself with her husband. On the other hand, the newborn child left by her started making sounds like the deep roar of the clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)