श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.4.24 
तत: सा राक्षसी गर्भं घनगर्भसमप्रभम्।
प्रसूता मन्दरं गत्वा गङ्गा गर्भमिवाग्निजम्।
समुत्सृज्य तु सा गर्भं विद्युत्केशरतार्थिनी॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस राक्षसी ने मंदराचल पर जाकर विद्युत के समान तेजस्वी एक बालक को जन्म दिया, मानो अग्नि से छूटे हुए तेज रूपी गंगा ने भगवान शिव (कुमार कार्तिकेय) के गर्भ से जन्म दिया हो। नवजात शिशु को वहीं छोड़कर वह विद्युतकेश के साथ समागम करने चली गई॥24॥
 
Thereafter, that Rakshasi went to Mandarachal and gave birth to a child as bright as lightning, as if Ganga had given birth to the womb of Lord Shiva (Kumar Kartikeya) in the form of glory left by the fire. Leaving the newborn baby there, she went for sexual intercourse with Vidyut Kesha. 24॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd