श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.4.15 
प्रहेतिर्धार्मिकस्तत्र तपोवनगतस्तदा।
हेतिर्दारक्रियार्थे तु परं यत्नमथाकरोत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उनमें प्रहेति बड़ा धर्मात्मा था; इसलिए वह तुरन्त ही वन में जाकर तपस्या करने लगा। परन्तु हेति ने विवाह के लिए बड़ा प्रयत्न किया॥15॥
 
‘Among them Praheti was a pious person; therefore he immediately went to the forest and started performing tapasya. But Heti made great efforts for marriage.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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