श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.4.13 
रक्षाम इति यैरुक्तं राक्षसास्ते भवन्तु व:।
यक्षाम इति यैरुक्तं यक्षा एव भवन्तु व:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तुममें से जिन्होंने रक्षा की बात कही है, वे राक्षस नाम से जाने जाएँ और जिन्होंने यक्ष (पूजा) करना स्वीकार किया है, वे यक्ष नाम से जाने जाएँ (इस प्रकार वे प्राणी राक्षस और यक्ष - दो वर्गों में विभक्त हो गए)।॥13॥
 
Those among you who have spoken of protection, let them be known by the name of demons and those who have accepted to perform Yaksha (worship), let them be known by the name of Yaksha' (in this way those beings got divided into two classes - demons and Yakshas).॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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