| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 4: रावण आदि का जन्म और उनका तप के लिये गोकर्ण - आश्रम में जाना » श्लोक 12 |
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| | | | श्लोक 7.4.12  | रक्षाम इति तत्रान्यैर्यक्षाम इति चापरै:।
भुक्षिताभुक्षितैरुक्तस्ततस्तानाह भूतकृत्॥ १२॥ | | | | | | अनुवाद | | वे सब प्राणी भूखे-प्यासे थे। उनमें से कुछ ने कहा - 'हम इस जल की रक्षा करेंगे' और कुछ ने कहा - 'हम इसकी पूजा करेंगे', तब उन प्राणियों के रचयिता प्रजापति ने उनसे कहा -॥12॥ | | | | ‘All those creatures were hungry and thirsty. Some of them said – ‘We will protect this water’ and others said – ‘We will worship it’, then Prajapati, the creator of those creatures, said to them -॥ 12॥ | | ✨ ai-generated | | |
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