| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 39: राजाओं का श्रीराम के लिये भेंट देना और श्रीराम का वह सब लेकर अपने मित्रों, वानरों, रीछों और राक्षसों को बाँट देना तथा वानर आदि का वहाँ सुखपूर्वक रहना » श्लोक 7-10 |
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| | | | श्लोक 7.39.7-10  | स्वानि राज्यानि मुख्यानि ऋद्धानि मुदितानि च।
समृद्धधनधान्यानि पूर्णानि वसुमन्ति च॥ ७॥
यथापुराणि ते गत्वा रत्नानि विविधान्यथ।
रामस्य प्रियकामार्थमुपहारं नृपा ददु:॥ ८॥
अश्वान् यानानि रत्नानि हस्तिनश्च मदोत्कटान्।
चन्दनानि च मुख्यानि दिव्यान्याभरणानि च॥ ९॥
मणिमुक्ताप्रवालांस्तु दास्यो रूपसमन्विता:।
अजाविकं च विविधं रथांस्तु विविधान् बहून्॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | उनके अपने-अपने प्रसिद्ध राज्य समृद्ध, सुख और आनन्द से युक्त, धन-धान्य और रत्न आदि से समृद्ध थे। उन राज्यों और नगरों में जाकर उन राजाओं ने श्री रामचंद्रजी को प्रसन्न करने के लिए नाना प्रकार के रत्न और उपहार भेजे। घोड़े, सवार, मणि, मदमस्त हाथी, उत्तम चंदन, दिव्य आभूषण, मणि, मोती, मूंगा, सुन्दर दासियाँ, नाना प्रकार के बकरे और भेड़ें तथा नाना प्रकार के बहुत से रथ भेंट किए। 7-10॥ | | | | Their respective famous kingdoms were prosperous, full of happiness and joy, rich in wealth and gems etc. Going to those states and cities, those kings sent various types of gems and gifts to please Shri Ramchandraji. Horses, riders, gems, intoxicating elephants, fine sandalwood, divine ornaments, gems, pearls, corals, beautiful maids, goats and sheep of various kinds and many chariots of various kinds were presented. 7-10॥ | | ✨ ai-generated | | |
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