श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 39: राजाओं का श्रीराम के लिये भेंट देना और श्रीराम का वह सब लेकर अपने मित्रों, वानरों, रीछों और राक्षसों को बाँट देना तथा वानर आदि का वहाँ सुखपूर्वक रहना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.39.3 
ऊचुस्ते च महीपाला बलदर्पसमन्विता:।
न राम रावणं युद्धे पश्याम: पुरत: स्थितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे सब राजा अपने बल के गर्व से भरे हुए आपस में इस प्रकार बातें करने लगे - 'हमने कभी भी भगवान राम और रावण को युद्ध में आमने-सामने खड़े नहीं देखा॥3॥
 
All those kings, filled with pride of their power, began talking among themselves like this - 'We have never seen Lord Rama and Ravana standing face to face in the war.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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